Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

“Hey Bhagwan! Kya aapne kabhi Lucknow ki galliyon mein aisi rahasyamayi ghatna ke bare mein suna hai?”

Disclaimer: Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

“कहानी में दिखाई गई सभी दृश्य, नाम एवं घटना काल्पनिक है इसका किसी भी जीवित – मृत घटना से कोई संबंध नहीं है यदि ऐसा होता है तो यह सिर्फ एक संजोग होगा अथवा हम किसी भी प्रकार के नशा, धूम्रपान, अश्लीलता या अपराध का समर्थन नहीं करते अतः कहानी को केवल मनोरंजन की दृष्टि से देखा जाए”! Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

पंडित वंशीधर नित्य की भांति गोमती नदी में स्नान कर रहे थे तभी उन्हें आभास हुआ कि कोई वजन वाली वस्तु नदी की लहरों के साथ उनके पैरों से टकराई है। इस बात का आभास होते ही उनका ध्यान भंग हो गया। श्री हरि की साधना में लीन पंडित जी ने ध्यान भंग होते ही अपनी एक आंख खोलकर अपने पैरों से टकराने वाली वस्तु को देखा जो कि वह एक टोकरी थी! Pandit Vanshmidhar Series Episode 1: Gomti Tat ka Rahasya.

गोमती नदी में बहती हुई टोकरी, टोकरी के अंदर धोती में लिपटा हुआ लगभग एक महीने का बालक जो इस वक्त बेहोश था या फिर मर चुका था। पंडित जी अपनी रोज की क्रियाओं को भूल कर उस बच्चे को पुकारने लगे, अब वह पहले की तरह सामान्य नहीं थे बल्कि बच्चे की ऐसी दशा को देखकर हैरान और परेशान हो चुके थे। परेशान इसलिए थे कि सुबह-सुबह यूं अचानक यह मुसीबत कहां से आ गई और हैरान इसलिए थे कि इस मासूम को मरने के लिए किसी जालिम ने निर्दयता के साथ क्यों छोड़ दिया वो भी इस सर्दी के मौसम में! Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

Pandit Vanshmidhar Series Episode 1

Lucknow Mystery Stories,

Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

कौन है इस बालक के माता-पिता? कहां रहते हैं? ऐसी क्या परिस्थितियां थी जो उन्होंने ऐसा घिनौना पाप किया? ऐसे ही ना जाने कितने सवालों के घोड़े पर सवार पंडित जी को यकायक एक झटका लगा जैसे कि उन्हें किसी ने सोते से उठाया हो। उन्होंने एक नजर बच्चे पर डाली जो अभी भी मूर्छित या मरणासन्न अवस्था में था! Pandit Vanshmidhar Series Episode 1 FREE VIGYAPAN HETU VISIT KARE SAMADHAN BLOGERS.IN

पंडित जी तेज-तेज कदमों के साथ नदी से बाहर निकल आए और बच्चे की नब्ज चेक करने लगे। कुछ समय बाद पंडित जी के होठों पर एक संतोषजनक मुस्कान थी। ये मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि बच्चा पूर्णतया स्वस्थ एवं कुशल है, सिर्फ ठंड की वजह से बेहोश हो गया है। ठीक एक पल के बाद उनकी नज़रें किसी को खोजने के लिए चारो तरफ दौड़ गई! Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

पंडित जी बच्चे के माता-पिता को ढूंढ रहे थे जो कि उन्हें दूर-दूर तक कहीं नजर नहीं आए और अफसोस कि उन्हें कोई सफलता भी नहीं मिली। एक प्रयास!, एक और प्रयास ना जाने क्या सोचकर उन्होंने एक और प्रयास किया और बच्चे के माता-पिता को ढूंढने के साथ-साथ जोर-जोर से पुकारने लगे, चीखने लगे, आवाजें लगाने लगे लेकिन दूसरी तरफ से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला! इसलिए शायद अब वह यह समझ चुके थे कि उन्हें अब बिना एक पल गवाएं क्या करना है!!! Hey Bhagwan! Pandit Vanshmidhar Episode 1: Ek Adbhut Kahani Ki Shuruat

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TO BE CONTINUE

“क्या पंडित वंशीधर उस रहस्यमयी आवाज़ का पीछा करेंगे? क्या लखनऊ की उन गलियों में कोई उनका इंतज़ार कर रहा है? जानने के लिए पढ़ते रहें समाधान ब्लॉगर्स।”

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